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28 Feb 2026, 11:20
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बटुक प्रकरण पर सियासी घमासान: अखिलेश यादव का ब्रजेश पाठक को सीधा संदेश
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Admin
रिपोर्टर, द पब्लिक एक्सप्रेस
Batuk प्रकरण को लेकर Akhilesh Yadav ने Brajesh Pathak को खुली चुनौती दी। समाज की गरिमा बचाने या इस्तीफा देने की बात कही। जानिए पूरा बयान।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रयागराज से जुड़े ‘बटुक प्रकरण’ ने नया मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने इस मुद्दे पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak को खुली चुनौती दी है। उनका कहना है कि यदि समाज की गरिमा और धार्मिक परंपराओं की रक्षा नहीं हो पा रही है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
प्रयागराज में आयोजित धार्मिक आयोजन के दौरान कुछ बटुक ब्राह्मणों के साथ कथित अभद्र व्यवहार की बात सामने आई। आरोप है कि उनकी पारंपरिक शिखा (चोटी) के साथ अनुचित व्यवहार किया गया, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर नाराज़गी देखी गई। घटना के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया। हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विपक्ष ने इसे सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा प्रश्न बताते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी समाज की धार्मिक परंपराओं और प्रतीकों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से सवाल किया कि यदि इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो राजनीतिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनके बयान का सार यही था कि “समाज का सम्मान सर्वोपरि है, और अगर सरकार इसे सुरक्षित नहीं रख पा रही तो नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की जानी चाहिए।” उनका यह बयान सीधे तौर पर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
ब्रजेश पाठक का पक्ष
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पूर्व में कई मंचों से धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सौहार्द के समर्थन में बयान दे चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने संबंधित मामले में संवेदनशीलता बरतने और तथ्यों की जांच के बाद उचित कार्रवाई की बात कही है। हालांकि इस प्रकरण को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मुद्दे केवल प्रशासनिक नहीं रहते, बल्कि जल्दी ही राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में सरकार और विपक्ष दोनों की भाषा और रुख महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इससे व्यापक सामाजिक संदेश जाता है। यह भी देखा जा रहा है कि प्रदेश में आने वाले राजनीतिक समीकरणों के मद्देनज़र विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा। वहीं सरकार पर दबाव है कि वह कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन दोनों को साधे।
आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या इस मामले में औपचारिक जांच या कार्रवाई की घोषणा होती है। साथ ही, राजनीतिक बयानबाज़ी कितनी दूर तक जाती है, यह भी आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।फिलहाल, प्रयागराज का यह मामला प्रदेश की राजनीति में एक अहम बहस का केंद्र बन चुका है—जहां धार्मिक परंपरा, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक जवाबदेही तीनों एक साथ चर्चा में हैं।
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