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राजनीति
महाराष्ट्र-बिहार की तर्ज पर यूपी में बीजेपी का नया हथकंडा: महिलाओं को लुभाने के लिए 50,000 रुपये का दांव
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|📅 13 Aug 2026, 06:31 PM|👁️ 68|📍 उत्तर प्रदेश
महाराष्ट्र और बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार द्वारा महिलाओं को 50,000 रुपये देने के फैसले को आगामी चुनावों को साधने के एक बड़े राजनीतिक हथकंडे के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ: महाराष्ट्र मध्य प्रदेश और बिहार के राजनीतिक रणक्षेत्र में चुनावों से ठीक पहले जिस तरह 'मास्टरस्ट्रोक' वाली वित्तीय योजनाओं के जरिए महिलाओं को साधने की रणनीति अपनाई गई थी, अब बिल्कुल उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी बड़ा दांव चल दिया है। बीजेपी ने अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने के लिए महिलाओं को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का नया राजनीतिक हथकंडा अपनाया है, जिसे विपक्षी दल सीधे तौर पर चुनावी तैयारियां और मास्टरस्ट्रोक रणनीति मान रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि महाराष्ट्र और बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी महिला वोट बैंक को साधने के लिए इस तरह के लोकलुभावन पैंतरे फेंके जा रहे हैं।
कुछ इसी तर्ज पर चली गई है अन्य राज्यों में चाल
महाराष्ट्र और बिहार मॉडल: जानकारों का मानना है कि जिस प्रकार अन्य राज्यों में चुनावों से पहले महिलाओं को सीधे खाते या योजनाओं के जरिए आर्थिक मदद देकर पाले में खींचने की कोशिश की गई, वही फॉर्मूला अब यूपी में भी एक्टिवेट कर दिया गया है।
मास्टरस्ट्रोक या सियासी मजबूरी:
बीजेपी के विरोधी इसे केवल महिला कल्याण न बताकर एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति करार दे रहे हैं, ताकि एंटी-इनकमबेंसी या महंगाई के मुद्दों से ध्यान हटाकर एक बड़ा महिला वोटबैंक तैयार किया जा सके।
योजना के जरिए क्या है सरकारी दावा?
आर्थिक संबल: इस योजना के तहत महिलाओं को 50,000 रुपये तक की मदद देने का ऐलान किया गया है ताकि वे खुद को आत्मनिर्भर बना सकें।
चुनावी वैतरणी पार करने का प्लान: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए आधी आबादी (Women Voters) को रिझाना सबसे कारगर हथियार माना जाता है, और बीजेपी इस मामले में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती।
अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र और बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में चला गया यह सियासी हथकंडा बीजेपी को कितना राजनीतिक लाभ पहुंचा पाता है और विपक्ष इस रणनीति की काट में क्या नया मोर्चा खोलता है।
जितेंद्र यादव | संपादक द पब्लिक एक्सप्रेस
जितेंद्र यादव पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए काम करते हुए जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है। स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, राजनीति, प्रशासन और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को करीब से कवर करने का उनका लंबा अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखना और जनता की आवाज को जिम्मेदारी के साथ उठाना है।