राजनीति
निजामाबाद के विधायक आलमबदी आज़मी का निधन, पूर्वांचल की राजनीति का एक युग हुआ समाप्त
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📅 23 Jul 2026, 08:44 AM
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Azamgarh
आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलमबदी आज़मी का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से पूर्वांचल की राजनीति ने एक सादगीपूर्ण और जनप्रिय नेता को खो दिया है।
आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा से विधायक आलमबदी आज़मी का गुरुवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे आजमगढ़, पूर्वांचल और समाजवादी पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई। उनके समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे जन राजनीति की बड़ी क्षति बताया।
आलमबदी आज़मी केवल एक विधायक नहीं, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति का ऐसा नाम थे जिन्होंने दशकों तक जनता के बीच रहकर अपनी अलग पहचान बनाई। सादगी, ईमानदारी और जनसेवा उनकी सबसे बड़ी पहचान रही। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी दिखावे की राजनीति नहीं की, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं को सुना और उन्हें विधानसभा तक पहुंचाया। यही कारण था कि क्षेत्र की जनता उन्हें अपना नेता नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानती थी।
राजनीतिक जीवन में आलमबदी आज़मी ने कई बार निजामाबाद विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज कर एक बार फिर जनता का भरोसा हासिल किया। इससे पहले भी वे कई बार विधायक चुने गए और लगातार क्षेत्र के विकास, किसानों, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे विधानसभा में उठाते रहे।
16 मार्च 1936 को आजमगढ़ जिले के विंदावल गांव में जन्मे आलमबदी आज़मी ने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन का रास्ता चुना और समाजवादी विचारधारा के साथ राजनीति में सक्रिय हुए। लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने अपनी साफ-सुथरी छवि और जनता से सीधे संवाद की परंपरा को हमेशा कायम रखा।
उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों का उनके आवास पर पहुंचना शुरू हो गया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सहित विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आलमबदी आज़मी का निधन केवल एक नेता की विदाई नहीं, बल्कि जनसेवा, सादगी और समाजवादी मूल्यों के एक युग का अंत है। अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।