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राहुल सांकृत्यायन के गांव कनैला पहुंची किसान-मजदूर-नौजवान चेतना पदयात्रा, संघर्ष और संगठन का दिया संदेश

jitendra yadav
02 Jul 2026, 06:12 AM 385 व्यूज
📌 किसान-मजदूर-नौजवान चेतना पदयात्रा राहुल सांकृत्यायन के गांव कनैला पहुंची। संदीप पाण्डेय समेत कई नेताओं ने किसानों और युवाओं को संगठित करने का आह्वान किया।
चक्रपानपुर/आजमगढ़, 18 जून 2026। स्वामी सहजानंद सरस्वती के गांव देवा से निकली किसान, मजदूर और नौजवान चेतना पदयात्रा गुरुवार को महान साहित्यकार, इतिहासकार और घुमक्कड़ चिंतक राहुल सांकृत्यायन के गांव कनैला पहुंची। चिलचिलाती धूप के बीच आगे बढ़ रही इस पदयात्रा का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। पदयात्रियों ने चक्रपानपुर स्थित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके विचारों और संघर्षों को याद करते हुए सभा आयोजित की। यात्रा के दौरान पदयात्रियों ने खरिहानी गांव में युवाओं के साथ संवाद स्थापित किया और मधुबन गांव पहुंचकर शहीद सुभाष रवि की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान आयोजित सभाओं में किसानों, मजदूरों और नौजवानों के सामने मौजूद चुनौतियों तथा उनके अधिकारों को लेकर चर्चा की गई। राहुल सांकृत्यायन के परिजन मदन पाण्डेय ने पदयात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती के गांव देवा से राहुल सांकृत्यायन के गांव कनैला तक पहुंची यह यात्रा दोनों महान विभूतियों के ऐतिहासिक संबंधों और संघर्ष की विरासत को फिर से जीवंत कर रही है। उन्होंने कहा कि पदयात्रियों ने राहुल सांकृत्यायन के घुमक्कड़ व्यक्तित्व को आत्मसात करते हुए उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस अवसर पर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोशलिस्ट पार्टी इंडिया के महासचिव संदीप पाण्डेय ने कहा कि चेतना पदयात्रा ने स्वामी सहजानंद सरस्वती और राहुल सांकृत्यायन के संघर्षों को पूर्वांचल के गांवों तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आम लोग अपने अधिकारों और हिस्सेदारी की लड़ाई स्वयं लड़ने के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राहुल सांकृत्यायन ने बिहार के गांवों में जाकर किसानों और मजदूरों को संगठित किया था, उसी तरह यह पदयात्रा भी किसानों, मजदूरों और युवाओं को एकजुट करने का प्रयास कर रही है। किसान नेता राजीव यादव ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन ने किसानों और मजदूरों के बीच जाकर संघर्ष का बिगुल फूंका था। यह पदयात्रा उनकी और स्वामी सहजानंद सरस्वती की विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान सबसे अधिक संवाद युवाओं से किया गया क्योंकि आज का नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। वहीं किसान नेता वीरेंद्र यादव ने कहा कि जिस तरह बिहार में स्वामी सहजानंद और राहुल सांकृत्यायन ने किसानों को संगठित किया था, उसी तरह पूर्वांचल में भी किसानों, मजदूरों और युवाओं को एकजुट करने का अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल अपनी खेती-किसानी की लड़ाई नहीं लड़ेगा, बल्कि उन युवाओं के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाएगा जो बेरोजगारी और आर्थिक संकट के कारण परेशान हैं। पदयात्रा में संदीप पाण्डेय, राजीव यादव, वीरेंद्र यादव, डॉ. राजेंद्र यादव, महेंद्र यादव, राजेंद्र चौधरी, भीम, रामशंकर, अवनीश चौरसिया, जेपी सिंह, संतराम यादव, दुर्गा यादव, अगरदीप राम, दीपक यादव, अधिवक्ता विनोद यादव, अवधेश यादव, हीरालाल यादव और दिनेश यादव सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और नौजवान शामिल रहे। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि चेतना पदयात्रा का उद्देश्य किसानों, मजदूरों और युवाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा सामाजिक न्याय, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के मुद्दों पर व्यापक जनचर्चा खड़ी करना है। यात्रा आगामी दिनों में भी विभिन्न गांवों में पहुंचकर जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करेगी।

द पब्लिक एक्सप्रेस न्यूज़लेटर

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